नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ मीम्स की बाढ़ कैसे आई, ई-20 से उनका नाम क्यों जुड़ा, अब कराए कई मुक़दमे

नितिन गडकरी

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इमेज कैप्शन, केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एथेनॉल की वकालत करते रहे हैं
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि वह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से मेटा, एक्स, गूगल और अन्य अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ दायर मानहानि के मुक़दमे पर पाँच अगस्त को सुनवाई करेगा.

यह मुक़दमा सोशल मीडिया पर प्रसारित डीपफेक सामग्री को लेकर दायर किया गया है. इनमें नितिन गडकरी को ग़लत तरीक़े से केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (ईबीपी) से जोड़कर दिखाया गया था.

जस्टिस आरिफ़ डॉक्टर की बेंच ने केंद्रीय मंत्री की ओर से पेश वकील संदीप एस. लड्डा को निर्देश दिया कि मुक़दमे से जुड़े सारे दस्वावेज़ उपलब्ध कराएं. इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई पाँच अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी.

नितिन गडकरी ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाते हुए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस सामग्री से उनकी छवि को ठेस पहुँची है.

नितिन गडकरी 2014 से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री हैं. उनका कहना है कि ई-20 नीति से उनका कोई संबंध नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिनमें उन्हें ग़लत तरीक़े से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (ईबीपी) के लिए जिम्मेदार बताया गया.

याचिका में सोशल मीडिया पर किए गए 24 ऐसे पोस्टों का उल्लेख किया गया है, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे नितिन गडकरी की मानहानि करते हैं और उन्हें ई-20 विवाद से जोड़ते हैं.

केंद्रीय मंत्री ने अदालत से इन पोस्टों को हटाने का निर्देश देने की मांग की है. साथ ही, उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा को कथित रूप से हुए नुकसान के लिए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है.

महाराष्ट्र

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इमेज कैप्शन, इसी महीने 15 जुलाई को मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने ठाणे के तीन पेट्रोल पंपों पर प्रदर्शन किया. उनकी मांग थी कि उपभोक्ताओं को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल न बेचा जाए

नितिन गडकरी निशाने पर कैसे आए?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सोशल मीडिया पर नितिन गडकरी निशाने पर आ गए थे. आंदोलन के दौरान भी गडकरी से जुड़े मीम्स दिख रहे थे.

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) समेत विपक्षी दलों ने अब उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया था.

सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल) जैसे एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति से कथित आर्थिक लाभ की बात कही गई थी.

अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह ई-20 और नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ जनसमर्थन जुटाने के लिए "नेशनल टाउन हॉल" आयोजित करेंगे.

केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस देश के युवाओं ने एक अहंकारी सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा. अब मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि ई-20 के मुद्दे का भी समाधान कर दें, इससे पहले कि यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले ले."

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी एथेनॉल नीति वापस लेने की मांग की है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने इसी महीने आरोप लगाया था कि इस नीति को "पर्याप्त वैज्ञानिक पुष्टि के बिना और देश भर के करोड़ों वाहन मालिकों के हितों की क़ीमत पर लागू किया जा रहा है.

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पिछले एक सप्ताह में सोशल मीडिया पर 'गडकरी इज़ नेक्स्ट' वाले मीम्स की बाढ़ आ गई है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में जंतर-मंतर से लौटते समय जेन-ज़ी प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से मज़ाक में कहते भी दिखाई दिए, "अब ई-20 के वक़्त मिलेंगे." हालांकि, सीजेपी के नेताओं ने अब तक इस तरह के किसी विशेष अभियान की घोषणा नहीं की है.

इसके बावजूद, "ई-20 जनता पार्टी" नाम से चल रहे सोशल मीडिया पेजों से भी हज़ारों लोग जुड़ चुके हैं. एक्स पर इसके 50 हज़ार से ज़्यादा फॉलोवर्स हो गए हैं.

खुद को "ई-20 जनता पार्टी" कहने वाले एक एक्स अकाउंट, जो संभवतः पहले से मौजूद किसी पुराने अकाउंट का नया नाम है, ने ज़ोर देकर कहा है कि वह कोई राजनीतिक दल नहीं है.

सोमवार आधी रात के बाद साझा की गई एक पोस्ट में कहा गया, "हम एक स्वतंत्र नागरिक आंदोलन हैं, जिसका मक़सद आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाना है. हमारा एकमात्र एजेंडा पारदर्शिता सुनिश्चित करना, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और भारत की ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के वास्तविक प्रभाव पर खुली सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देना है."

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इमेज कैप्शन, 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में इंडियन यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने रायसीना रोड पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की थी

ई-20 से नितिन गडकरी का नाम कैसे जुड़ा?

पिछले साल सितंबर महीने में नितिन गडकरी ने सरकार की एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति के ख़िलाफ़ लॉबिंग का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा था कि कुछ निहित स्वार्थ इस बदलाव को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. ई-20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए गडकरी ने कहा था, "हर जगह लॉबी होती हैं क्योंकि हित जुड़े होते हैं. पेट्रोल लॉबी बहुत ताक़तवर है."

उन्होंने यह टिप्पणी नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के 65वें वार्षिक सम्मेलन में की थी.

उन्होंने कहा था, "सोशल मीडिया पर मेरे ख़िलाफ़ चलाया गया अभियान एक प्रायोजित अभियान था. सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में दायर याचिका ख़ारिज कर चुका है. उसमें कोई तथ्य नहीं था."

ई-20 ईंधन की शुरुआत अप्रैल 2023 में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर की गई थी. इसके बाद अप्रैल 2025 में इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया. इसने ई-10 ईंधन की जगह ली, जिसमें 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था और जिसका इस्तेमाल भारत में अधिकांश कारें करती थीं. एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और चावल जैसे खाद्यान्नों से तैयार किया जाता है.

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इमेज कैप्शन, नितिन गडकरी 2014 से केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री हैं

नितिन गडकरी पर आरोप क्या हैं?

सोशल मीडिया पर यह आरोप भी लगाए गए हैं कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के पीछे नितिन गडकरी का निहित स्वार्थ है, क्योंकि उनके परिवार का संबंध पुर्ती समूह जैसी गन्ना आधारित कंपनियों से है.

पिछले साल आठ अगस्त को अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के माइंड इवेंट में गडकरी ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा था, "यह जानबूझकर चलाया गया दुष्प्रचार अभियान है. हमने एक ऐसे संगठन की पहचान की है, जो लोगों को फोन करके उनसे एक्स पर पोस्ट लिखवा रहा है. संभव है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साज़िश हो. राजनीति में ऐसा होता रहता है."

उन्होंने कहा था, "अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 2001 में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत की थी. क्या उन्होंने यह मेरे कहने पर किया था?"

गडकरी ने कहा था कि उनके परिवार की कंपनियों को हर साल 30 करोड़ रुपये का नुक़सान होता है. उन्होंने दावा किया कि उन्हें कई बार इन कंपनियों को बंद करने की सलाह दी गई, लेकिन अपने व्यक्तिगत लगाव के कारण उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने कहा था कि ये कंपनियां केवल 1.3 लाख लीटर एथेनॉल का उत्पादन करती हैं, जो बहुत ही कम मात्रा है.

उन्होंने कहा था, "अगर मैं इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन या फ्लेक्स इंजन वाली गाड़ियों को बढ़ावा देता हूं, तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं उनका निर्माण भी करता हूं? मैं कई वैकल्पिक और जैव ईंधनों को इसलिए बढ़ावा देता हूं ताकि कच्चे तेल के आयात और प्रदूषण में कमी आए, किसान आत्महत्या न करें और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सके."

गडकरी ने ज़ोर देकर कहा था कि एथेनॉल मिश्रण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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