प्रियंका गांधी और अनुराग ठाकुर संसद में भिड़ गए, वजह थे आईआईटी के ये प्रोफ़ेसर

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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नवगठित शिक्षा सुधार समिति के एक सदस्य को "गोमूत्र विशेषज्ञ" कहे जाने पर मंगलवार को लोकसभा में हंगामा हो गया.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई सांसद इस टिप्पणी पर भड़क गए. बाद में सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद का अपमान कर रही हैं.
केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया है.
इसी के तहत पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितता रोकने के मक़सद से हाई-पावर्ड टास्क फ़ोर्स यानी नई शिक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है.
इसमें तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफ़ेसर वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं.
लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान मंगलवार को प्रियंका गांधी ने इसी समिति का ज़िक्र करते हुए कहा, "इस नई कमेटी में तो एक पूर्व आईबी चीफ़, एक आईटी कंपनी के संस्थापक और एक गोमूत्र विशेषज्ञ भी हैं. इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता. यही सच है."
हालांकि प्रियंका गांधी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को व्यापक रूप से आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफ़ेसर वी. कामकोटि की ओर इशारा माना गया.
प्रोफ़ेसर वी. कामकोटि गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों पर अपनी राय के कारण पहले भी चर्चा में रहे हैं.
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में बोलते हुए प्रियंका गांधी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सरकार द्वारा एक और समिति गठित किए जाने पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, "माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से प्रधानमंत्री से कहना चाहती हूं कि शायद उन्हें अपने सलाहकार बदलने चाहिए. नई-नई समितियां बनाने से काम नहीं चलेगा, चाहे उनका अध्यक्ष कोई भी हो."
उन्होंने पहले गठित राधाकृष्णन समिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसकी सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं किया गया है.
प्रियंका गांधी ने कहा, "राधाकृष्णन समिति भी व्यवस्था में सुधार के लिए बनाई गई थी, लेकिन आज तक उसकी एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई. और इस नई समिति में एक पूर्व आईबी प्रमुख हैं, एक आईटी कंपनी के संस्थापक हैं और एक 'गौमूत्र विशेषज्ञ' भी हैं."
बीजेपी की प्रतिक्रिया

लोकसभा में प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी पर एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद का अपमान करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "मैं प्रियंका जी को इसका जवाब दूंगा. जिस तरह वह मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करती हैं, हल्की मुस्कान के साथ बोलती हैं और स्पीकर से भी मुस्कुराने के लिए कहती हैं, वह गंभीर मुद्दों पर भी ऐसा ही करती हैं. वह अपनी ही सरकार की गलतियों और विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश करती हैं."
उन्होंने आगे कहा, "मुझे सबसे अधिक दुख इस बात का है कि उन्होंने भारत के एक महान वैज्ञानिक और आईआईटी मद्रास के प्रोफ़ेसर वी. कामकोटि जी के बारे में इस तरह की टिप्पणी की. वह हमारी एडवाइजरी इंटेलिजेंस टास्क फ़ोर्स के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अगर उनका आरएसएस से जुड़ाव है, तो इसमें कोई ग़लत बात नहीं है. आपको भी आरएसएस से जुड़ना चाहिए, वहां आपको संस्कार मिलेंगे और देश के बारे में सोचना सीखेंगी."
अनुराग ठाकुर ने कहा, "मुझे लगा था कि प्रियंका गांधी, राहुल गांधी से बेहतर होंगी और अपने भाई से कुछ अलग होंगी. कम से कम वह मुस्कुराती तो थीं. लेकिन आज आईआईटी मद्रास के निदेशक पर की गई उनकी टिप्पणी के बाद मुझे लगता है कि भाई-बहन दोनों एक ही रास्ते पर हैं."
प्रोफ़ेसर कामकोटि और गोमूत्र पर उनके विचार
प्रोफेसर वी. कामकोटि गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं.
जनवरी 2025 में चेन्नई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि गोमूत्र में फंगल संक्रमण, बैक्टीरिया और सूजन के ख़िलाफ़ प्रभावी गुण मौजूद हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस विषय पर शोध किए गए हैं और इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं.
उनके भाषण का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया. आलोचकों ने इन दावों को ग़ैर-वैज्ञानिक बताते हुए सवाल उठाया कि देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख की ओर से इस तरह की बातें करना कितना उचित है.
अपने बचाव में प्रोफेसर कामकोटि ने कहा कि सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित पांच शोध-पत्र गोमूत्र के संक्रमण-रोधी (एंटी-इन्फ़ेक्टिव) गुणों के दावों का समर्थन करते हैं.
उन्होंने जिन अध्ययनों का उल्लेख किया, उनमें "पेप्टाइड प्रोफाइलिंग इन काउ यूरिन रिवील्स मॉलिक्यूलर सिग्नेचर ऑफ फिज़ियोलॉजी-ड्रिवन पाथवेज़ एंड इन-सिलिको प्रेडिक्टेड बायोऐक्टिव प्रॉपर्टीज़" शीर्षक वाला शोध भी शामिल था, जिसके प्रमुख लेखक रोहित कुमार और अन्य शोधकर्ता हैं.
प्रोफेसर कामकोटि के अनुसार, यह अध्ययन आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (करनाल, हरियाणा) ने किया था. उनका कहना था कि यह 2021 में प्रकाशित हुआ था और नेचर समूह की एक पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ.
कौन हैं प्रोफ़ेसर कामकोटि

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आईआईटी मद्रास की बेवसाइट के मुताबिक़ प्रोफ़ेसर कामकोटि वीझिनाथन ने 17 जनवरी 2022 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के नए निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला.
प्रोफ़ेसर कामकोटि आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में फ़ैकल्टी सदस्य रह चुके हैं. वे आईआईटी मद्रास में इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च (आईसीएसआर) के एसोसिएट डीन के पद पर भी रह चुके हैं. वे भारत सरकार की कई एजेंसियों और संस्थाओं से जुड़े रहे हैं, जिनमें भारत सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका भी शामिल है.
प्रोफ़ेसर कामकोटि ने उस शोध टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित माइक्रोप्रोसेसर 'शक्ति' को डिज़ाइन किया और उसे सफलतापूर्वक शुरू किया.
इसका इस्तेमाल मोबाइल कंप्यूटिंग डिवाइस और नेटवर्किंग सिस्टम में किया जा सकता है. यह संचार और रक्षा क्षेत्रों में आयातित माइक्रोप्रोसेसर पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. 'शक्ति' माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के माइक्रोप्रोसेसर के बराबर क्षमता रखने का दावा करता है.
वर्ष 2017 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने प्रोफ़ेसर कामकोटि को विभिन्न क्षेत्रों के विकास में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम करने वाली टास्क फ़ोर्स का चेयरमैन नियुक्त किया था.
उन्हें निम्नलिखित पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं:
* अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फ़ेलोशिप, 2020.
* आईईएसए टेक्नो विज़नरी अवॉर्ड, 2018.
* आईबीएम फ़ैकल्टी अवॉर्ड, 2016.
* डीआरडीओ एकेडमी एक्सीलेंस अवॉर्ड, 2013.
* आईआईटी मद्रास यंग फ़ैकल्टी रिकग्निशन अवॉर्ड (वाईएफआरए), 2007.
* इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी श्रेणी में वासविक रिसर्च अवॉर्ड, 2017.
* एडवांस्ड कंप्यूटिंग एंड कम्युनिकेशन सोसाइटी (एसीसीएस) की ओर से लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड.
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