'वीबी जी राम जी' के खिलाफ मज़दूर संगठनों का विरोध, 'मनरेगा' बहाल करने की मांग

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केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'विलेज बेस्ड गारंटीड रूरल एम्प्लॉयमेंट मिशन' (वीबी जी राम जी) के ड्राफ्ट नियमों का बुधवार को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में विभिन्न मज़दूर संगठनों और रोजगार अधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है.
उनका आरोप है कि यह प्रस्ताव महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमज़ोर करता है और ग्रामीण मज़दूरों के काम के अधिकार पर असर डाल सकता है.
बुधवार को जारी एक प्रेस बयान में नरेगा संघर्ष मोर्चा, अखिल भारतीय कृषि मज़दूर यूनियन और दूसरे संगठनों ने कहा कि सरकार 'वीबी जी राम जी' को मनरेगा के विकल्प के रूप में पेश कर रही है और इसमें प्रति परिवार 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का दावा किया गया है.
हालांकि, संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित फंड आवंटन इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
नरेगा संघर्ष मोर्चा से जुड़े निखिल डे ने आरोप लगाया कि नए ढांचे में राज्यों की भूमिका सीमित कर दी गई है और इससे संघीय व्यवस्था कमज़ोर होगी.
उन्होंने 'वीबी जी राम जी' को वापस लेकर 'मनरेगा' को बहाल करने की मांग की.
मज़दूर संगठनों ने डिजिटल हाजिरी, ई-केवाईसी, फेशियल रिकग्निशन और नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का भी मुद्दा उठाया.
राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के मज़दूरों ने दावा किया कि नेटवर्क की समस्या, तकनीकी खामियों और पहचान संबंधी त्रुटियों के कारण उन्हें काम और मज़दूरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
अखिल भारतीय कृषि मज़दूर यूनियन के महासचिव बी. वेंकट ने घोषणा की कि 1 जुलाई से देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे, जो 'वीबी जी राम जी' को वापस लेने तक जारी रहेंगे.
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्राफ्ट नियमों में कानूनी न्यूनतम मज़दूरी की कोई स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है. उन्होंने केंद्र सरकार से 'वीबी जी राम जी' को रद्द करने, मनरेगा को मज़बूत रूप में जारी रखने और डिजिटल उपस्थिति व बायोमेट्रिक आधारित प्रणालियों को समाप्त करने की मांग की है.


































