होर्मुज़ में अमेरिका-ईरान फिर भिड़े, सऊदी पर हूती हमले: क्यों बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें

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कच्चे तेल की क़ीमतें क़रीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गईं.
अमेरिका ने मंगलवार को ईरानी तेल टैंकरों पर हमले किए और हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था.
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष में यह एक नया और गंभीर टकराव माना जा रहा है.
क़ीमतों को ऊपर ले जाने वाली मुख्य ताक़तें मध्य-पूर्व में जियोपॉलिटिकल संघर्ष हैं, जिसमें पर्सियन गल्फ़ में अमेरिका-ईरान संघर्ष और यमन में सऊदी अरब के साथ हूतियों के बीच टकराव शामिल है. इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है.
अमेरिका के सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना ने पाँच ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया. यह कार्रवाई इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर की ओर से पिछले दो दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई.
अमेरिकी हमलों के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में तेज़ी आई. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट सोमवार के बंद भाव से 2.4 फ़ीसदी बढ़कर 99.34 डॉलर प्रति बैरल हो गया. मंगलवार सुबह कारोबार में क़ीमतों में 1.5 फीसदी की और तेज़ी आई और यह 99.44 डॉलर तक पहुँच गया.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से अगस्त के अंत से तेल की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं. जून के मध्य में दोनों देशों के बीच समझौते के बाद कुछ समय के लिए तनाव कम हुआ था. लेकिन अब वह दौर ख़त्म हो गया है. इससे पहले अप्रैल के अंत में ब्रेंट की क़ीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. जुलाई में यह गिरकर 70 डॉलर तक आ गई थी.
भारत की बढ़ेंगी मुश्किलें
कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण भारत का आयात बिल बढ़ेगा और इसे वहन करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं होगा. भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने का मतलब है कि समान मात्रा में तेल ख़रीदने के लिए भारत को पहले से ज्यादा डॉलर ख़र्च करने पड़ रहे हैं.
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होता है. विश्लेषकों के मुताबिक, तेल की क़ीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारत का डॉलर में होने वाला आयात बिल बढ़ेगा और व्यापार संतुलन के साथ रुपये पर दबाव पड़ सकता है.
कच्चे तेल की ऊंची क़ीमतों का असर ईंधन, परिवहन और ऊर्जा से जुड़ी अन्य लागतों के ज़रिए घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है.
फ़िलहाल खुदरा पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में तीन महीने से ज़्यादा समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है. पिछली बार 25 मई को क़ीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था.
कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी ईंधन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाने के कारण इन कंपनियों को पहले ही जमा हुए घाटे का सामना करना पड़ रहा है.

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एक दूसरे पर हमले जारी
ईरान समर्थित हूती विद्रोही मध्य-पूर्व में एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे हैं. इससे आपूर्ति संकट और गहरा गया है. इसने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ाई है और बॉन्ड बाज़ारों में बिकवाली भी बढ़ी है.
सेंटकॉम के मुताबिक़, जिन टैंकरों पर उसने हमला किया वो ईरान के उस शैडो नेटवर्क का हिस्सा थे, जो आईआरजीसी और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को फंड मुहैया कराता है. सेंटकॉम ने कहा कि हमले से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज छोड़ने के लिए कहा गया था. इन जहाजों को ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया.
सेंटकॉम ने कहा कि जिस अमेरिकी युद्धपोत को ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया था, वह इसकी चपेट में नहीं आया और किसी भी अमेरिकी कर्मी को चोट नहीं लगी. अमेरिका ने पिछले चार दिनों में आठ ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया है.
शनिवार को अमेरिका ने कहा था कि उसने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाया, जब तेहरान ने दो अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें दागी थीं. सेंटकॉम ने कहा था कि एक पोत और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर ने आईआरजीसी के हमले को चकमा दिया था.
ईरानी रिवोल्यूशनरी कोर ने कहा कि ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका के ताज़ा हमलों के जवाब में उसने दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया और उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया. इसके अलावा उसने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के "प्रतिबंधित और असुरक्षित क्षेत्र को पार करने की कोशिश" करने वाले 10 जहाजों को भी निशाना बनाया गया.
समूह ने बुधवार तड़के यह भी कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी अल-अजराक एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया. उसके मुताबिक़, हमले में रखरखाव और मरम्मत के हैंगर, तैयारी संबंधी सुविधाएं और लड़ाकू विमानों के शेल्टर निशाना बने.
विश्लेषकों ने इस साल के बाक़ी हिस्से और 2027 के लिए कच्चे तेल की क़ीमतों के अपने अनुमान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं. इसकी वजह यह बढ़ती समझ है कि इस क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति में आई रुकावट लंबे समय तक बनी रह सकती है.
यूरेशिया ग्रुप ने चेतावनी दी है कि चीन की मांग में सुधार और मध्य-पूर्व में जारी गतिरोध जल्द ही तेल की क़ीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा सकता है.
हूतियों ने ऐसे समय में सऊदी अरब पर हमले बढ़ाए हैं, जब होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही पर ख़तरा बना हुआ है. इसकी वजह से सऊदी अरब के पूर्वी तट के टर्मिनलों से तेल भेजना मुश्किल हो रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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