लाइव, स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के बाद जामिया में 15 दिन बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश

छात्र संघ की मांग को लेकर बीते कई दिनों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी.

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  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
  • ये घटना बहराइच ज़िले की है

लाइव कवरेज

संदीप राय

  1. स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के बाद जामिया में 15 दिन बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश

    जामिया
    इमेज कैप्शन, छात्र संघ की मांग को लेकर बीते कई दिनों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे

    दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के कई दिनों के प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की मांगें मान ली हैं.

    यूनिवर्सिटी ने छात्रसंघ चुनाव कराने और विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का आदेश दिया है.

    26 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक़, विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे.

    विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी.

    आदेश के मुताबिक़, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के ख़िलाफ़ दिए गए बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमति जताई है. संबंधित पोस्ट हटाने के लिए भी कहा गया है.

    आदेश जारी होने के साथ ही छात्रों से विरोध प्रदर्शन तत्काल समाप्त करने को कहा गया है.

  2. इस देश में छात्र आंदोलन से निकली पार्टी ने जीते आम चुनाव

    सर्बिया
    इमेज कैप्शन, लंबे समय से सत्ता में रहे नेता अलेक्जेंडर वुचिच ने समय से पहले हुए संसदीय चुनावों में अपनी हार मान ली है

    सर्बिया के लंबे समय से सत्ता में रहे नेता अलेक्जेंडर वुचिच ने समय से पहले हुए संसदीय चुनावों में छात्र आंदोलन के हाथों अपनी हार स्वीकार कर ली है.

    रविवार देर रात उन्होंने कहा, "हमारे पास अभी अंतिम नतीजे नहीं हैं, लेकिन यह साफ है कि हम ये चुनाव हार गए हैं."

    दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता वुचिच के हार स्वीकार करने के बाद देश में जश्न मनाया गया.

    चुनाव जीतने वाली पार्टी 'स्टूडेंट लिस्ट' के नेता इलिजा स्रदानोविच ने बीबीसी सर्बियन से कहा, "सर्बिया अब फ्री स्टेट बनेगा."

    अलेक्जेंडर वुचिच
    इमेज कैप्शन, अलेक्जेंडर वुचिच ने रविवार को अपनी हार स्वीकार की

    सर्बिया के चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इस बार रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने मतदान किया. टिप्पणीकारों का मानना था कि अधिक मतदान से छात्र आंदोलन को फ़ायदा हो सकता है.

    भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ दो साल से चल रहे थे प्रदर्शन

    वुचिच ने दो साल से जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद समय से पहले चुनाव कराने का फैसला किया था.

    ये प्रदर्शन नोवी साद शहर में एक रेलवे स्टेशन की छतरी गिरने की घटना के बाद शुरू हुए थे. इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी. इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक माना गया.

    सर्बिया
    इमेज कैप्शन, छात्र आंदोलन की जीत के बाद सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा

    वुचिच दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं. तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होने के कारण वह अपनी पार्टी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) का नेतृत्व कर रहे थे. उनका लक्ष्य फिर से प्रधानमंत्री बनना था. उन्होंने 2017 में यह पद छोड़ दिया था.

    छात्र आंदोलन की पार्टी की ओर से प्रमुख उम्मीदवार इलिया स्रदानोविच
    इमेज कैप्शन, छात्र आंदोलन की पार्टी की ओर से प्रमुख उम्मीदवार इलिया स्रदानोविच
    सर्बिया
    इमेज कैप्शन, बीते दो साल से देश में छात्र आंदोलन चल रहा था और दक्षिणपंथी सरकार के ख़िलाफ़ में ख़ासा गुस्सा था

    छात्र आंदोलन की पार्टी की ओर से प्रमुख उम्मीदवार इलिया स्रदानोविच ने बीबीसी सर्बियन से कहा, "यह एक आज़ाद देश होगा."

    उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी इस आंदोलन को सर्बिया भर में सरकार के विरोध में मतदान करने वाले लोगों का समर्थन मिला है. आंदोलन का लक्ष्य "देश को तानाशाही से मुक्त कराना" है.

  3. ब्राज़ीलः बोल्सोनारो ने लूला की जीत मानने से किया इनकार, चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की

    फ़्लेवियो बोल्सोनारो
    इमेज कैप्शन, फ़्लेवियो बोल्सोनारो, लूला के ख़िलाफ़ मैदान में खड़े थे और उन्हें अपनी जीत की पूरी उम्मीद थी

    ब्राज़ील आम चुनावों में हार के बाद पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को मानने से मना कर दिया है.

    फ्लावियो बोल्सोनारो नतीजों से साफ तौर पर नाराज़ दिखे, उन्होंने कहा कि जो हुआ, वह 'असंभव' और 'समझ से परे' है.

    उनके पिता पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो फ़िलहाल हाउस अरेस्ट में हैं. फ्लावियो ने लूला की जीत को स्वीकार करने से इनकार किया और चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की.

    अपनी ताज़ा टिप्पणियों के साथ फ्लावियो ने अपने पिता जाएर बोल्सोनारो का रास्ता अपनाया है. जाएर बोल्सोनारो ने भी 2022 में चुनाव में अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

  4. नेतन्याहू और पीएम मोदी की दोस्ती पर क्या बोले ओवैसी

    एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
    इमेज कैप्शन, ओवैसी ने कहा कि उमरा करने गए 4,000 लोग फंसे हुए हैं उन्हें विशेष विमान से लाया जाना चाहिए

    एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू की दोस्ती पर टिप्पणी की है.

    रविवार को उत्तर प्रदेश के कैराना में एक सभा के दौरान ओवैसी ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी आपको बिन्यामिन नेतन्याहू के साथ अपनी करीबी दोस्ती को कम करना चाहिए, क्योंकि अंत में यह आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है."

    उन्होंने कहा, "अगर यह जंग छिड़ती है, तो भारत को नुकसान होगा. हमें खुलकर बोलना चाहिए और ट्रंप से कहना चाहिए कि वे जंग न करें, क्योंकि इससे भारत को नुकसान पहुंचेगा. पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी. भगवान न करे, अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो बीच में फंसे भारतीयों का क्या होगा?"

    "हम पहले से ही उमरा करने गए अपने 4,000 जायरीन को वापस लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मोदी जी, आपको कदम उठाना चाहिए. खुलकर अपनी बात कहिए और ट्रंप से कहिए कि हम युद्ध नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं. भारत का असली हित इसी में है."

    उन्होंने कहा कि अगर उमरा करने गए लोगों को अगर वापस नहीं लाया गया तो तीन चार दिन में उनके 'भीख मांगने की नौबत' आ सकती है. उन्होंने विशेष विमान भेजकर फंसे हुए लोगों को वापस लाने का इंतज़ाम करने की मांग की.

  5. अरुणाचल प्रदेश में बांध विरोधी प्रदर्शन हिंसक होने के बाद आरएएफ़ की टुकड़ियां भेजी गईं

    रैपिड एक्शन फ़ोर्स
    इमेज कैप्शन, आरएएफ़, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) की एक विशेष दंगा-रोधी इकाई है. इसके जवान नीली वर्दी पहनते हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की बहुउद्देश्यीय परियोजना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हिंसक होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने हालात संभालने के लिए रैपिड एक्शन फ़ोर्स (आरएएफ़) की दो कंपनियां पासीघाट भेजी हैं.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, पूर्वी सियांग ज़िले के पासीघाट में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने के बाद ये ख़बर आई है.

    गृह मंत्रालय के निर्देश पर नवी मुंबई से आरएएफ़ के करीब 250 जवानों को भारतीय वायुसेना के परिवहन विमान से अरुणाचल प्रदेश भेजा गया है.

    परियोजना को लेकर लोगों में आशंकाएं

    सियांग नदी पर प्रस्तावित इस बड़ी बांध परियोजना का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है. अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि परियोजना को लेकर ग़लत जानकारी और भ्रांतियों की वजह से लोगों में आशंकाएं पैदा हो रही हैं.

    खांडू ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (एआईटीएफ़) और सामुदायिक संगठनों के साथ बैठक की. इस बैठक में परियोजना को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और सही जानकारी पहुंचाने पर चर्चा हुई.

    पेमा खांडू के मुताबिक़, लोगों को परियोजना, उसके रणनीतिक महत्व और उससे जुड़ी चिंताओं को समझने के लिए सही जानकारी मिलना ज़रूरी है.

    उन्होंने तथ्यों, पारदर्शिता और खुली बातचीत के ज़रिए लोगों की आशंकाएं दूर करने पर ज़ोर दिया.

    समाचार एजेंसी पीटीआई से दो दिन पहले उन्होंने कहा था, "मैं लोगों को सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट पर चर्चा के लिए ईटानगर आने या मुझे पासीघाट बुलाने का न्योता देता हूं. बंद या हिंसा से समस्याओं का समाधान नहीं होता. यह परियोजना जनता की सहमति से आगे बढ़ेगी."

  6. नेतन्याहू के समर्थन में ट्रंप क्यों बोले- जिसे शुरू किया था, वो काम ख़त्म करना है

    ट्रंप
    इमेज कैप्शन, इसराइल में आम चुनाव होने जा रहे हैं और ट्रंप ने अपना पूरा समर्थन नेतन्याहू के लिए दिया है

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल में आम चुनावों से ठीक पहले प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को वोट देने की अपील की है.

    उन्होंने कहा, “नेतन्याहू को वोट दें. हमें उस काम को पूरा करना है, जिसकी शुरुआत हमने की थी.”

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट करते हुए लिखा, “हर कोई जानता है, यहां तक कि दुश्मन भी, बीबी (नेतन्याहू) और मेरे बीच मिलकर जीत हासिल करने का शानदार रिश्ता रहा है. मैंने वेनेज़ुएला पर हमला किया, जो इतिहास के सबसे सफल सैन्य अभियानों में से एक था. लेकिन इससे पहले हमने 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' चलाया था, जिसके जरिए दुनिया में आतंकवाद को समर्थन देने वाले नंबर एक देश को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका गया.”

    “इसके बाद हमने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चलाया. अब ईरान के पास न तो नौसेना है और न ही वायुसेना. उसकी सेना और अर्थव्यवस्था, दोनों बुरी तरह बिखर चुकी हैं. ईरान में महंगाई दर 301 प्रतिशत तक पहुंच गई है. नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान तेल हासिल नहीं कर पा रहा है. उसके नेतृत्व के दो स्तर, जिनमें सैन्य और अन्य नेतृत्व शामिल हैं, खत्म हो चुके हैं.”

    एक दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान पर हमले को लेकर कहा था कि उन्होंने अभी तय नहीं किया है कि वो समझौता करेंगे या जंग छेड़ेंगे.

    ट्रंप ने नेतन्याहू को वोट देने की अपील करते हुए कहा, “जब आप मतदान करने जाएं, तो कृपया याद रखें कि बीबी एक असाधारण लड़ाकू प्रधानमंत्री रहे हैं.”

    “कुछ बेहद बुरे लोगों ने इसराइल को 'छोटा शैतान' और अमेरिका को 'बड़ा शैतान' कहा था. अब दुनिया भर में 'अमेरिका की मौत हो, इसराइल की मौत हो' जैसे नारे नहीं सुनाई देने चाहिए और न ही ऐसे नारे फिर सुनाई देंगे.”