पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
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सात साल के बाद भारत आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बातचीत हुई.
इस बैठक को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि दोनों नेताओं की शिखर सम्मेलन के इतर एक सार्थक बैठक हुई.
उन्होंने तियानजिन में अपनी पिछली मुलाक़ात के बाद भारत-चीन संबंधों में हुई स्थिर प्रगति की समीक्षा की.
रणधीर जायसवाल ने कहा, "दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया. उन्होंने पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक हित और पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर सहयोग आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई."
इस बैठक को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर जिनपिंग के साथ की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "हमने भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की. साथ ही, हमने चीनी पक्ष को अगले वर्ष शुरू होने वाली चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं."
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की कि अगले साल चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने एक्स पर पोस्ट किया, चीन इस अवसर का इस्तेमाल सहमति बनाने के लिए करेगा और सभी पक्षों के साथ मिलकर भविष्य की योजना तैयार करेगा.
उन्होंने लिखा, "हम सब मिलकर ब्रिक्स सहयोग के तीसरे स्वर्णिम दशक की शुरुआत करेंगे."
सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले में शामिल होने से इराक़ी मिलिशिया का इनक़ार
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ईरान समर्थक इराक़ी हथियारबंद समूह, 'इस्लामिक रेजिस्टेंस अलायंस फ़ॉर इराक़' (आईआरआई) ने सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन को निशाना बनाने वाले हमलों में शामिल होने से इनक़ार किया है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, 12 सितंबर को टेलीग्राम पर जारी एक बयान में समूह ने कहा कि उसे हैरानी है कि इराक़ी सरकार ने बिना ठोस सबूत या जांच के इतनी जल्दी इन आरोपों को स्वीकार कर लिया.
आईआरआई ने अपने बयान में सऊदी बलों और सऊदी समर्थिक लड़ाकों के ख़िलाफ़ मोर्चे पर यमनी लोगों की "लगातार सफलताओं" के लिए उन्हें बधाई दी.
इराक़ी मिलिशिया ने चेतावनी दी है कि इराक़ को इन "यहूदी-अमेरिकी साज़िशों" का हिस्सा नहीं बनने दिया जाना चाहिए.
उनका कहना है कि इन साज़िशों का मक़सद देश को ऐसे संकटों में धकेलना है जो केवल उसके दुश्मनों के हित पूरी करते हैं.
समूह का कहना है कि वह घटना की जांच के लिए गठित किसी भी सरकारी समिति के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है.
इराक़ी मिलिशिया का यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है.
इराक़ ने स्वीकार किया है कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले एक ऐसे प्रांत से किए गए थे जो ईरान की सीमा से लगता है.
इसके बाद इराक़ी अधिकारियों ने एक सैन्य कमांडर को बर्खास्त करने और घटना की जांच शुरू करने की घोषणा की है.
सीएम योगी से सवाल पूछने पर ट्रोल हो रहीं एक महिला पत्रकार ने क्या बताया?, प्रेरणा, लखनऊ से बीबीसी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, स्वतंत्र पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर ख़तरा है
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
इस वायरल वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश करती दिखाई देती हैं और मुख्यमंत्री उन्हें हाथ दिखाते हुए आगे बढ़ जाते हैं.
मंच पर मौजूद बीजेपी के दूसरे नेता भी उनके साथ चले जाते हैं.
महिला पत्रकार की पहचान दिव्या श्रीवास्तव के तौर पर हुई है.
टॉप सीक्रेट नाम के एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में इस पत्रकार ने दावा किया है कि "मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश के बाद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ अभद्रता की."
इस यूट्यूब चैनल से बातचीत में उनका आरोप है कि "कुछ लोगों ने उनके घर पर बुलडोज़र चलाने जैसी धमकी भी दी."
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने दिव्या श्रीवास्तव बात की.
दिव्या ने हमें बताया कि वह स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करती हैं और इससे पहले भी बीजेपी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जाती रही हैं.
उनके मुताबिक़, वह मुख्यमंत्री से उत्तर प्रदेश में बारिश के बाद जलभराव और एक्सप्रेस-वे पर सामने आ रही समस्याओं को लेकर सवाल पूछना चाहती थीं.
उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मुख्यमंत्री के करीब आधे घंटे तक बोलने के बाद जब वह जाने लगे तो उन्होंने सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सवाल पूछने का मौका नहीं मिला.
दिव्या ने यह भी दावा किया कि इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को लेकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि वह लखनऊ में अकेली रहती हैं और इस वजह से उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है.
इस मामले में यूथ कांग्रेस ने अपने एक्स पोस्ट में पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं.
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इमेज कैप्शन, योगी आदित्यनाथ (फ़ाइल फ़ोटो)
बीजेपी ने क्या कहा
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
बीबीसी हिन्दी से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह प्रेस कॉन्फ़्रेंस बीजेपी के 'सेवा संकल्प अभियान' के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित की गई थी और इसमें सवाल-जवाब का सत्र रखा ही नहीं गया था.
उनके मुताबिक़, "प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मॉडरेटर यह तय करता है कि सवाल-जवाब होंगे या नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद महिला पत्रकार ने वीडियो बनाने के उद्देश्य से इस तरह की बातें कहीं."
बीजेपी प्रवक्ता ने इस पत्रकार की पत्रकारिता की पहचान पर भी सवाल उठाया और कहा कि "उन्हें नहीं पता कि वह किस संस्थान से जुड़ी हैं."
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि "अगर किसी पत्रकार या महिला को सोशल मीडिया पर धमकी मिलती है तो उसे पुलिस में शिक़ायत करनी चाहिए और पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए."
एसआईआर के विरोध में नागरिक समाज संगठन जल्द जंतर-मंतर पर जुटेंगे, प्रकाश राज ने ये बताया, इमरान क़ुरैशी, बेंगलुरु से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, जंतर मंतर पर अलग-अलग राज्यों के नागरिक समाज संगठनों ने प्रदर्शन का एलान किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
जंतर-मंतर एक बार फिर चर्चा में रह सकता है.
अलग-अलग राज्यों के नागरिक समाज संगठनों ने चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ख़िलाफ़ 1 या 2 अक्तूबर को प्रदर्शन करने की योजना बनाई है.
अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने कहा कि नागरिक समाज समूह इस महीने कम से कम 10 ज़िलों का दौरा करेंगे.
वे हर राज्य में लगभग 100 बूथों का दौरा कर ऐसे सबूत जुटाएंगे, जिनसे यह पता चले कि इस प्रक्रिया ने देश के नागरिकों को किस तरह की परेशानी पहुंचाई है.
उन्होंने कहा, "हम अपना सोशल ऑडिट करेंगे. हमारा मानना है कि देश भर में हटाए गए मतदाताओं की संख्या क़रीब 15 करोड़ हो सकती है."
"अब यह साफ़ हो गया है कि यह एक घोटाला और साज़िश है. इसने नागरिकों की गरिमा और अधिकारों को ख़तरे में डाल दिया है. किसी सरकार या संविधान ने किसी को भी नागरिकों को ऐसी परेशानी में डालने का अधिकार नहीं दिया है."
प्रकाश राज ने कहा कि नागरिक समाज ने शुरुआत से ही चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों के लोगों के अनुभव को देखते हुए उन्हें पहले से आशंका थी.
उन्होंने कहा, "जब यह प्रक्रिया कर्नाटक में शुरू हुई तो हम सतर्क थे. हमने कहा था कि तुरंत चुनाव नहीं होने वाले हैं. अगर मक़सद यह है कि हर पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल हो, तो इसके लिए समय लिया जाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "यह कोई टी-20 मैच या बारिश से प्रभावित पांच ओवर का मैच नहीं है. चुनाव में अभी दो साल हैं. लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई. इसे सिर्फ़ एक महीने की प्रक्रिया बना दिया गया. एएसडीडीओ सूची के तहत एक करोड़ 80 लाख नाम हटाए गए थे. बाद में 2002 मैपिंग के बाद यह संख्या डेढ़ करोड़ रह गई. हमने छह महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की थी."
उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मां का उदाहरण देते हुए कहा, "24 अगस्त को जारी विवरण में अंग्रेज़ी और कन्नड़ में नाम अलग-अलग हैं. पति का नाम भी कन्नड़ और अंग्रेज़ी में अलग लिखा गया है. पते भी अलग हैं."
प्रकाश राज ने कहा, "अब यह साबित हो चुका है कि यह एक घोटाला है. यह मुझे नोटबंदी की याद दिलाता है, जब लोगों को अपने ही पैसे के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ा था."
उन्होंने आगे कहा, "यह मुझे कोरोना काल की भी याद दिलाता है, जब लोगों की मदद के लिए कोई राजनीतिक दल आगे नहीं आया था. सार्वजनिक सभाओं के लिए राजनीतिक दलों के पास लोगों को लाने के लिए बसें, ट्रक, पैसा और बिरयानी के पैकेट होते हैं. लेकिन कोरोना के दौरान लोगों को दूर-दराज़ स्थित अपने घरों तक पैदल जाने के लिए अकेला छोड़ दिया गया था."
महबूबा मुफ़्ती बोलीं, भारत ग़ज़ा और ईरान पर भी दिखा सकता था 'असली नेतृत्व'
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इमेज कैप्शन, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती (फ़ाइल फ़ोटो)
ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने एक्स पर एक टिप्पणी की है.
उन्होंने लिखा, “हम ब्रिक्स की ओर से पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा का स्वागत करते हैं. लेकिन भारत, मौजूदा ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में, उस समय साहस और वास्तविक नेतृत्व दिखा सकता था, जब वह एक ऐसा प्रस्ताव लाता जिसमें ग़ज़ा में इसराइल के नरसंहार और ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमले की भी स्पष्ट रूप से निंदा की जाती.”
“इस हमले में न केवल ईरान के कई राजनीतिक नेता मारे गए, बल्कि सैकड़ों स्कूली बच्चे भी मारे गए. आतंकवाद की निंदा चुनिंदा तरीके से नहीं की जा सकती. आम लोगों का खून किसी राष्ट्रीयता का मुद्दा नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए दोहरे मानदंड नहीं हो सकते.”
ग़ौरतलब है कि ब्रिक्स ने ग़ज़ा में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की. समूह ने फ़लस्तीनियों के जबरन विस्थापन और ग़ज़ा में किसी भी भौगोलिक स्थिति या आबादी में बदलाव का विरोध किया.
ब्रिक्स ने कहा कि इसराइल-फ़लस्तीन संघर्ष का न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान शांतिपूर्ण तरीके से ही संभव है.
ईरान के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स में फ़लस्तीन का मुद्दा उठाया, और क्या बोले
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इमेज कैप्शन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि ब्रिक्स देशों को न्याय की आवाज़ बनना चाहिए.
पेज़ेश्कियान ने कहा कि फ़लस्तीन का मुद्दा और फ़लस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा, वैश्विक शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता और वैधता की एक बड़ी परीक्षा है.
एक्स पर किए गए एक पोस्ट के मुताबिक़, उन्होंने कहा, इस मामले में ब्रिक्स को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
ग़ौरतलब है कि ब्रिक्स सम्मेलन में मंजूर हुए नई दिल्ली घोषणापत्र में भी फ़लस्तीन से जुड़ी मांगें शामिल हैं. इसमें ब्रिक्स ने ग़ज़ा में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की.
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इमेज कैप्शन, ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का हाथ थामे पीएम नरेंद्र मोदी, साथ में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
ईरान को लेकर ये कहा
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बोलते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को हमलों और धमकियों से सुरक्षित रखा जाना चाहिए.
उनका कहना था कि इन स्थलों पर कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा ख़तरा है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को न्याय की आवाज़ बनना चाहिए.
उन्होंने कहा कि टिकाऊ सुरक्षा तभी संभव है, जब राष्ट्रीय संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाए और "कुछ के लिए सुरक्षा, दूसरों के लिए असुरक्षा" के मॉडल को ख़ारिज किया जाए.
उन्होंने अपने देश के संबंध में कहा, "एकतरफ़ा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए व्यावहारिक क़दम उठाना, ब्रिक्स सदस्य देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए."
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इमेज कैप्शन, ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान और भारत की राष्ट्रपति मुर्मु
पहली भारत यात्रा पर राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाक़ात
अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति और भारतीय राष्ट्रपति की मुलाक़ात हुई.
राष्ट्रपति की प्रेस सेकेट्ररी के मुताबिक़, राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ईरान के सहयोग की सराहना की.
दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा की.
अब ट्रंप ने यूरोप में इन दो हिस्सों को मिलाने की बात कही, मिला करारा जवाब
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इमेज कैप्शन, आयरलैंड की राष्ट्रपति कैथरीन कॉनॉली के साथ अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने मुलाक़ात की जो उनकी नीतियों की विरोधी रही हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के दौरे पर आयरलैंड पहुंचे हैं.
इस दौरान उन्होंने कहा कि वह आयरलैंड और उत्तरी आयरलैंड को मिलाकर "एक संयुक्त आयरलैंड" देखना चाहेंगे. उन्होंने कहा कि यह भविष्य में कभी न कभी होगा और "अभी भी हो सकता है."
उन्होंने आयरलैंड की राष्ट्रपति कैथरीन कॉनॉली और प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन से मुलाक़ात की.
राष्ट्रपति कॉनॉली ने इस मुलाक़ात के बाद कहा कि उन्होंने ट्रंप को आयरलैंड के लोगों का यह संदेश दिया कि "युद्ध और नरसंहार को सामान्य नहीं माना जा सकता."
बता दें कि आयरलैंड यूरोप के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक देश है. यह ग्रेट ब्रिटेन द्वीप के पश्चिम में स्थित है. इसकी राजधानी डबलिन है.
जबकि आयरलैंड का उत्तरी हिस्सा, यानी नॉर्दर्न आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) का हिस्सा है.
पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव में कॉनॉली का समर्थन करने वाले वामपंथी दलों ने उन पर गज़ा का मुद्दा ट्रंप के सामने उठाने का दबाव बनाया था.
कॉनॉली पहले भी ट्रंप और अमेरिका की नीतियों की आलोचना करती रही हैं. ख़ास तौर पर वह मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर मुखर रही हैं.
आयरिश अमेरिकियों को साध रहे ट्रंप
बीबीसी के अमेरिकी विदेश विभाग संवाददाता टॉम बेटमैन के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों को आने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
टॉम बेटमैन का कहना है कि मौजूदा सर्वेक्षणों में रिपब्लिकन पार्टी के एक या दोनों सदनों में बहुमत गंवाने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में आयरलैंड के एकीकरण के समर्थन में ट्रंप की टिप्पणी को महज़ एक आकस्मिक बयान नहीं माना जा रहा है.
उनके मुताबिक, अमेरिका में लगभग 3.1 करोड़ आयरिश मूल के लोग रहते हैं और इनमें से कई ऐसे राज्यों में बसे हैं जहां चुनावी मुक़ाबला काफ़ी कड़ा है.
इसलिए ट्रंप की यह टिप्पणी आयरिश मूल के मतदाताओं को लुभाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है. बेटमैन का कहना है कि ट्रंप के इस बयान को अमेरिका में काफ़ी प्रमुखता मिली है और आयरिश मूल के कई मतदाता इसे सकारात्मक रूप से देख सकते हैं.
शी जिनपिंग बोले, इतिहास के सही पक्ष में मजबूती से खड़े हों ब्रिक्स देश
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इमेज कैप्शन, ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि ब्रिक्स देशों को इतिहास के सही पक्ष में मज़बूती से खड़ा रहना चाहिए.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए शी जिनपिंग के दिए संबोधन के बारे में जानकारी दी.
पोस्ट के मुताबिक़, जिनपिंग ने कहा है कि ब्रिक्स देशों को अपने समय का अग्रदूत बनने का प्रयास करना चाहिए.
सात साल बाद भारत आए जिनपिंग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया दो युद्धों के बीच फंसी हुई है.
एक ओर, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है. और दूसरी ओर ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल मिलकर लड़ रहे हैं, बदले में ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र के देशों के अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं.
जब जिनपिंग यह बयान दे रहे थे तो सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान भी मौजूद थे.
जिनपिंग ने ज़ोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों को वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए.
उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद, आपसी सीख और समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
उनके मुताबिक, इससे देशों के बीच सहयोग और विश्वास मज़बूत होगा.
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स को वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और उसे अधिक न्यायसंगत एवं प्रभावी बनाने का नेतृत्व भी करना चाहिए.
ब्रिक्स सम्मेलन: तस्वीरों में देखिए
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इमेज कैप्शन, ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का हाथ थामे पीएम नरेंद्र मोदी, साथ में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
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इमेज कैप्शन, भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन का पहला दिन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन ही दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है.
इस वैश्विक आयोजन की तस्वीरें देखिए
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इमेज कैप्शन, रूस और चीन के राष्ट्रपति का हाथ थामे भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की इस तस्वीर की चर्चा हो रही है, इसे उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है
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इमेज कैप्शन, भारत मंडमप में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, भारतीय पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान (बाएं से दाएं)
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इमेज कैप्शन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
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इमेज कैप्शन, ब्रिक्स सम्मेलन के इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से मिलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
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इमेज कैप्शन, ब्रिक्स सम्मेलन के इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान भी मौजूद हैं
पीएम मोदी बोले- 'ब्रिक्स समूह किसी के ख़िलाफ़ नहीं है'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है. यह समूह किसी के ख़िलाफ़ नहीं है.
नई दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार की दोपहर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने यह बयान दिया.
उन्होंने कहा "पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है. हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति के साथ आगे बढ़ते हैं. हम किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं. अब समय आ गया है कि हम अपनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस नतीजों में बदलें."
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इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 सूत्रीय रोडमैप का प्रस्ताव रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विभिन्न वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला भी बनना होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते.
मोदी ने कहा, "आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी जगह पीछे है. हमें इस 'विशेषाधिकार वाले पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना होगा, जहां हर देश की आवाज़ हो, हर सदस्य की भागीदारी हो और मानवता का विकास हर प्रयास के केंद्र में हो."
मोदी ने यह बात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी में कही.
मायावती क्यों बोलीं- 'मेरे अविवाहित रहने के कारण मजबूरी में ... '
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इमेज कैप्शन, मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को हाल में पार्टी से निष्कासित कर दिया था
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों पर पार्टी और मूवमेंट का लाभ उठाने का आरोप लगाया है.
ग़ौरतलब है कि दस सितंबर को मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का एलान किया था.
उन्होंने लिखा, "मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सगे भाई-बहनों में से किसी एक को अपने साथ रखना पड़ा और अंततः मेरे सबसे छोटे भाई आनंद कुमार यह ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं. वे मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं. लेकिन उनके परिवार को इसका लाभ मिलना पार्टी और मूवमेंट के हित में नहीं होगा."
"इसलिए मेरा अंतिम फ़ैसला है कि उनके किसी भी बेटे को बीएसपी में किसी भी पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा."
मायावती ने कहा कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी सहायता के लिए किसी और सदस्य की ज़रूरत पड़ती है, तो उनकी बेटी दीपिका आनंद मदद कर सकती हैं.
उन्होंने कहा कि दीपिका की ईमानदारी, वफ़ादारी और कार्यक्षमता के आधार पर उन्हें आगे चलकर पार्टी में ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि अगर दीपिका यह भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी की सहमति से दलित समाज के किसी समर्पित कार्यकर्ता को यह ज़िम्मेदारी दी जा सकती है.
शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, राउत ने कहा, "मोदी कह रहे हैं कि चीन के साथ रिश्तों में सुधार आएगा. अब जबकि चीन के प्रीमियर भारत आए हैं तो उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि जो आप लद्दाख और गलवान में घुस गए हैं. वहां से पहले पीछे हटें, हमारी ज़मीन हमें वापस दें"
उन्होंने भारत-चीन के बीच सीमा विवाद से जुड़ी वार्ताओं को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "अब तक दो साल के भीतर चीन के साथ 25 दौर की वार्ता हो चुकी है, रिश्तों में क्या सुधार हुआ है?"
ग़ौरतलब है कि करीब सात साल के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने भारत आए हैं. साथ ही, वे पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी हिस्सा ले सकते हैं.
राउत ने ईरान के राष्ट्रपति का ज़िक्र करते हुए कहा, "ईरान के राष्ट्रपति शेर की तरह यहां आए हैं. अन्य नेता भी आए हैं, लेकिन जिस ईरान ने पिछले छह महीनों तक अमेरिका और इसराइल का सामना किया है, मैं उसे ज़्यादा महत्व देता हूं. मैं उन्हें शेर मानता हूं."
ग्रैमी पुरस्कार विजेता और अमेरिकी रैपर लिल डर्क इस मामले में हुए बरी
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इमेज कैप्शन, ग्रैमी पुरस्कार विजेता रैपर लिल डर्क को 2024 में गिरफ़्तार किया गया था
ग्रैमी पुरस्कार विजेता रैपर लिल डर्क को अमेरिका में हत्या से जुड़े एक मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है.
उन पर प्रतिद्वंद्वी रैपर क्वांडो रोंडो के चचेरे भाई की हत्या की साज़िश रचने का आरोप था.
लिल डर्क, जिनका असली नाम डर्क डेवोन्टे बैंक्स है, को 2024 में गिरफ़्तार किया गया था. तीन दिन तक चली जूरी की चर्चा के बाद उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया.
फ़ैसले के बाद उनके समर्थकों ने अदालत के बाहर जश्न मनाया.
हालांकि इस मामले में बरी होने के बावजूद बैंक्स अभी हिरासत में हैं. उन्हें 5 अक्तूबर को एक अलग मुक़दमे का सामना करना होगा, जिसमें हत्या और हथियारों से जुड़े आरोप शामिल हैं.
अभियोजन पक्ष का दावा था कि बैंक्स ने 2020 में मारे गए रैपर किंग वॉन की मौत का बदला लेने के लिए यह साज़िश रची थी.
शिकागो के रहने वाले रैपर लिल डर्क को चार ग्रैमी अवार्ड के लिए नॉमिनेशन मिला था. फिर 2024 में "ऑल माई लाइफ़" गीत के लिए ग्रैमी पुरस्कार जीता था.
लिल डर्क ने 2010 में ओटीएफ की स्थापना की और यह समूह शहर के ड्रिल रैप सीन का केंद्र है.
अभी तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता शिवांगी जायवसाल आज रात दस बजे तक ख़बरें पहुंचाएंगी.
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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का दावा- पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया
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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय (फ़ाइल फ़ोटो)
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को दावा किया है कि उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया.
अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बताया कि वो गोंडा के बर्तन कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के बाद उनके परिवार से मिलने जा रहे थे, इसी दौरान उन्हें गिरफ़्तार किया गया.
अजय राय ने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें वो पुलिसकर्मियों से बात करते हुए नज़र आ रहे हैं.
अजय राय ने लिखा, "भाजपाइयों की तानाशाही और यूपी पुलिस का डर अब चरम पर है! गोंडा के कर्नलगंज (रेक्सड़िया) में मृत बर्तन कारोबारी स्वर्गीय विनोद साहनी जी के पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त करने जा रहा था. लेकिन भाजपा सरकार के इशारे पर कठपुतली बनी पुलिस ने मुझे थाना मसौली-जनपद बाराबंकी पर ग़ैर-कानूनी तरीक़े से गिरफ़्तार कर लिया."
उन्होंने लिखा, "अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम यह सरकार पीड़ितों के आंसू पोंछने वालों से डरती है! भाजपा चाहे जितने पहरे लगा ले, लोकतंत्र में जनता की आवाज़ और पीड़ितों की लड़ाई दबने वाली नहीं है. हम हर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ लड़ेंगे और न्याय दिलाकर रहेंगे."
दरअसल, 9 सितंबर 2026 की रात को 45 वर्षीय विनोद साहनी जब अपनी दुकान बंद करके बाइक से घर लौट रहे थे, तब शाहपुर धनोवा इलाके में कुछ हमलावरों ने उन्हें रास्ते में रोका और हमला कर दिया.
इलाज के दौरान लखनऊ में विनोद साहनी की मौत हो गई.
हरीश रावत ने 'इस्तीफ़े' वाले बयान के बाद कहा- कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे ख़ून में
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इमेज कैप्शन, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत (फ़ाइल फ़ोटो)
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कांग्रेस से नहीं बल्कि पार्टी के पदों से इस्तीफ़ा देने की बात कही थी.
हरीश रावत ने एक्स पर लिखा, "मीडिया के कुछ हिस्सों में यह समाचार दिया जा रहा है कि हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दे दिया."
"भैया, कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे ख़ून और हड्डियों में है, हरीश रावत जो कुछ भी है, इनकी वजह से है. वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जाएगी."
रावत ने कहा, "कल-परसों देहरादून में ईडी की जो पाखंडपूर्ण चकल्लस हुई है और मैंने यह कहा है कि यदि उससे कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है, तो पार्टी के जो पद मेरे पास हैं उन्हें मैं छोड़ना चाहूंगा.''
दरअसल, हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरीश रावत के सहयोगी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की थी. इसके बाद रावत ने इस्तीफ़े की बात कही है.
हरीश रावत ने कहा था कि यदि पार्टी के संघर्ष में उनकी वजह से कोई कमज़ोरी आती है तो वो पार्टी पदों से हटना चाहेंगे.
शी जिनपिंग पहुंचे दिल्ली, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
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इमेज कैप्शन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच गए हैं
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं. जिनपिंग का विमान दिल्ली के पालम एयरबेस पर लैंड हुआ.
शी जिनपिंग इससे पहले 2019 में भारत आए थे. उस दौरान चेन्नई के पास मामल्लापुरम में दोनों देशों के नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी.
इस बीच, भारत में चीन के राजदूत शू फ़ेहोंग ने शुक्रवार देर रात एक्स पर लिखा कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारियों में जुटे हैं.
जिनपिंग के पहुंचने से ठीक पहले 'चाइना सदर्न एयरलाइंस' ने छह साल बाद भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू करने का एलान किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एयरलाइन ने शनिवार को बताया कि 21 सितंबर से ग्वांगझोउ और नई दिल्ली के बीच उड़ानें फिर शुरू होंगी.
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इमेज कैप्शन, जिनपिंग का विमान दिल्ली के पालम एयर बेस पर लैंड हुआ है
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इमेज कैप्शन, शी जिनपिंग इससे पहले 2019 में भारत आए थे
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इमेज कैप्शन, पालम हवाई एयरबेस पर उतरने के बाद शी जिनपिंग का स्वागत किया गया
जिनपिंग के भारत आने से पहले बड़ा फ़ैसला, ग्वांगझोउ-दिल्ली के बीच शुरू होगी डायरेक्ट फ़्लाइट
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इमेज कैप्शन, एयरलाइन ने शनिवार को बताया कि 21 सितंबर से ग्वांगझोउ और नई दिल्ली के बीच उड़ानें फिर शुरू होंगी (फ़ाइल फ़ोटो)
चीन की 'चाइना सदर्न एयरलाइंस' छह साल बाद भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू करने जा रही है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एयरलाइन ने शनिवार को बताया कि 21 सितंबर से ग्वांगझोउ और नई दिल्ली के बीच उड़ानें फिर शुरू होंगी.
एयरलाइन के मुताबिक़, इस सेवा के शुरू होने के बाद दक्षिण एशिया में उसकी साप्ताहिक उड़ानों की संख्या 100 से ज़्यादा हो जाएगी. कंपनी दक्षिण एशिया के आठ रूट पर आने-जाने वाली उड़ानें चलाएगी.
उड़ान सेवा बहाल करने का यह एलान ऐसे समय हुआ है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचने वाले हैं.
भारत और चीन के बीच सीधी यात्री उड़ान 2020 में कोरोना महामारी के बाद बंद हो गई थी.
इसके बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चले सैन्य तनाव के कारण भी उड़ान सेवाएं पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी थीं.
इराक़ और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की फ़ोन पर क्या बातचीत हुई
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इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान (बाएं) अल सऊद और इराक़ के विदेश मंत्री फ़ुआद हुसैन (फ़ाइल फ़ोटो)
इराक़ के विदेश मंत्री फ़ुआद हुसैन और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान अल सऊद ने शनिवार सुबह फ़ोन पर बातचीत की.
दरअसल, इराक़ी क्षेत्र से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बात की है.
इराक़ी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक़, दोनों विदेश मंत्रियों ने क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम और साझा चिंता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की है.
बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने इराक़ और सऊदी अरब के बीच लगातार संपर्क और समन्वय जारी रखने के महत्व पर ज़ोर दिया."
भले ही इराक़ी क्षेत्र की ओर हमले हुए हों, लेकिन सऊदी अरब ने इराक़ के प्रति समर्थन व्यक्त किया है और कहा कि वो जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा. इराक़ ने हमले की जांच करने का आश्वासन दिया है.