लाइव, यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा दावा, इस अफ़्रीकी देश की बढ़ी अहमियत
अफ़्रीकी तट और यमन के बीच का संकरा जलमार्ग अदन की खाड़ी को लाल सागर और उसके आगे स्वेज़ नहर से जोड़ता है. यह यूरोप और एशिया के बीच यात्रा करने वाले जहाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है.
यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा दावा, इस अफ़्रीकी देश की बढ़ी अहमियत
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इमेज कैप्शन, हूती विद्रोहियों ने यमन के पश्चिमी तट से 'सऊदी समर्थित बलों' को खदेड़ने का भी दावा किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
बीबीसी अफ़्रीका संवाददाता सिमी जोलाओसो के मुताबिक़ बाब अल-मंदेब के ठीक सामने छोटा सा देश जिबूती स्थित है, जिसकी भौगोलिक स्थिति ने इसे अफ़्रीका के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बना दिया है.
जिबूती की लोकेशन उसे मिलिट्री बेस बनाने के लिए काफ़ी उपयुक्त समझी जाती है. यह व्यस्त शिपिंग मार्ग पर पड़ने वाला देश है. इसके साथ ही अपने बाक़ी पड़ोसी देशों के मुक़ाबले यहां के राजनीतिक हालात स्थिर हैं.
अफ़्रीकी तट और यमन के बीच का संकरा जलमार्ग अदन की खाड़ी को लाल सागर और उसके आगे स्वेज़ नहर से जोड़ता है. यह यूरोप और एशिया के बीच यात्रा करने वाले जहाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है.
सिमी जोलाओसो ने बताया है कि इसी वजह से जिबूती के तट पर सैन्य शक्ति की असामान्य मौजूदगी देखने को मिलती है. अमेरिका, चीन, फ्रांस, जापान और इटली सभी देश यहां अपनी सेना रखते हैं.
जापान का एकमात्र विदेशी सेल्फ-डिफेंस फोर्स बेस भी यहीं है. इसके अलावा लंबे समय से फ्रांस की सेनाएं और इटली का सैन्य बेस भी यहां मौजूद हैं.
इनके अभियानों में समुद्री डकैती और आतंकवाद से निपटने से लेकर शिपिंग की सुरक्षा, खुफ़िया जानकारी जुटाना और लॉजिस्टिक सहायता देना शामिल है.
पानी के दूसरी ओर यमन में लड़ाई तेज होने के साथ इस स्थान का महत्व फिर बढ़ गया है.
इमेज कैप्शन, अगस्त 2026 में हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा दिखाता नक्शा
अब तक जो बातें पता हैं-
- ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि "सऊदी जहाज़ों को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए समुद्री आवाजाही सुरक्षित है. सऊदी जहाज़ "नाकेबंदी के अधीन" हैं.
- हूती ने यमन में बड़ी बढ़त हासिल करने का दावा किया है. गुरुवार को ही उन्होंने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया था.
- समूह ने यमन के पश्चिमी तट से "सऊदी समर्थित बलों" को खदेड़ने का भी दावा किया है, लेकिन पेरिम द्वीप का ज़िक्र नहीं किया है.
-हूती विद्रोहियों ने नौ विमानों को गिराने का दावा किया है और छह ज़िलों से सऊदी समर्थित सरकारी बलों को पीछे धकेलने की बात कही है.
इमेज कैप्शन, बाब अल-मंदेब रेड सी से यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है
यमन के पूरे लाल सागर तट पर 'हूतियों का नियंत्रण', अमेरिका के लिए क्या है संदेश, नवल अल-मग़ाफ़ी, वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय संवाददाता
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इमेज कैप्शन, हूती लड़ाकों ने यमन में कई अहम ठिकानों पर क़ब्ज़ा कर लिया है (फ़ाइल फ़ोटो)
मोखा पर क़ब्ज़े के बाद से हूती लड़ाकों के बयानों में एक दिलचस्प बात यह है कि वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को उनसे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है.
समूह का कहना है कि जहाज़ लाल सागर और बाब अल-मंदेब में सुरक्षित रूप से आवाजाही जारी रख सकते हैं. लेकिन सऊदी अरब से जुड़े जहाज़ हूती हथियारबंद गुट की नौसैनिक नाकेबंदी के दायरे में बने हुए हैं.
यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है. हूती विद्रोहियों ने पहले भी लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए ख़तरा पैदा करने की अपनी क्षमता दिखाई है.
अपने मौजूदा ख़तरे को स्पष्ट रूप से सऊदी अरब से जुड़े जहाज़ों तक सीमित करके वे राष्ट्रपति ट्रंप और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत दे सकते हैं कि कम से कम फिलहाल उनका इरादा अमेरिकी जहाज़ों को निशाना बनाने या इसे बड़े टकराव में बदलने का नहीं है.
इससे वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया को लेकर एक दिलचस्प सवाल उठता है.
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर गुरुवार को ट्रंप से हूतियों के ख़िलाफ़ सीधे अमेरिकी सैन्य सहयोग की मांग की थी. अमेरिका ने इससे इनकार कर दिया.
इसके बजाय उसने ख़ुफ़िया जानकारी और लक्ष्यों की पहचान में सहयोग की पेशकश की है, लेकिन उसका कहना है कि कम से कम फिलहाल वह सीधे सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है.
ट्रंप प्रशासन एक और मोर्चा खोलने से बचने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देता है, जबकि उसकी सेनाएं ईरान और होर्मुज़ स्ट्रेट पर केंद्रित हैं.
इसलिए हो सकता है कि हूती सोच-समझकर एक अंतर बना रहे हों. सऊदी अरब और उसके महत्वपूर्ण लाल सागर तेल मार्ग पर अधिकतम दबाव डालना, जबकि अमेरिका को सीधे संघर्ष में उतरने की तत्काल कोई वजह देने से बचना.
हालांकि अगर लड़ाई बढ़ती है, तो क्या वे यह अंतर बनाए रख पाएंगे, यह पूरी तरह अलग सवाल है.
इस बीच एएफ़पी के मुताबिक़, एक यमनी सैन्य अधिकारी ने बताया है कि हूती गुट ने यमन के पूरे लाल सागर तट पर नियंत्रण कर लिया है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन की सरकार से जुड़े इस अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया, "पश्चिमी तट पर हमारे नियंत्रण में जो कुछ भी था, वह सब हमारे हाथ से निकल गया है."
सैन्य अधिकारी ने एएफ़पी को यह भी बताया कि हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित दो अन्य द्वीपों पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है.
ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम में अमेरिका को लेकर ये कहा
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इमेज कैप्शन, ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाक़ात हुई है
ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद मेज़ेश्कियान ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई है.
पीएम मोदी ने इस मुलाक़ात के बाद एक्स पर लिखा, “ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान से मिलकर खुशी हुई. यह यात्रा इसलिए और ख़ास है क्योंकि यह भारत की उनकी पहली यात्रा है.”
"हमने भारत-ईरान मित्रता पर चर्चा की. हमारा मानना है कि हमें दीर्घकालिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उनसे क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई. भारत स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है."
अमेरिकी प्रतिबंधों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसने आर्थिक दबाव डालने के लिए अन्य देशों के वैध व्यापार को ख़तरे में डाल दिया है.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "वर्तमान वैश्विक वित्तीय व्यवस्था कुछ सीमित मुद्राओं पर केंद्रित होने के कारण कमजोर है. ब्रिक्स बैंक सदस्य देशों के लिए मुद्रा का मुख्य आधार बन सकता है."
पेज़ेश्कियान ने कहा, "ईरान एक अधिक खुली और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था के लिए ब्रिक्स सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है. अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा संसाधनों के साथ, ईरान ब्रिक्स आर्थिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनने के लिए तैयार है."
प्रतिबंधों के विस्तार और अमेरिका के आर्थिक युद्ध के चलते, ईरानी अधिकारी अमेरिकी डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली से ख़ुद को दूर करने के लिए चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ब्रिक्स को एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिसमें कोई भी देश किसी वित्तीय साधन या प्रौद्योगिकी पर एकाधिकार करके दूसरों के वैध व्यापार को बाधित न कर सके."
महाराष्ट्र: सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 9 लोगों की मौत, कई घायल, आलोक पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, टक्कर इतनी गंभीर थी कि नौ लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई
महाराष्ट्र के भंडारा ज़िले में रायपुर-नागपुर नेशनल हाईवे पर शुक्रवार को एक सड़क दुर्घटना में छत्तीसगढ़ के नौ लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
कबीरधाम ज़िले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव के अनुसार, "छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले से लोग एक बोलेरो वाहन में सवार हो कर, पोला-तीजा उत्सव में भाग लेने नागपुर जा रहे थे. उसी दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर साकोली-लाखनी मार्ग पर मुंडीपार के पास यह एक ट्रक से टकरा गई."
यह टक्कर इतनी गंभीर थी कि नौ लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई. मृतकों में छह महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं.
इधर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस हादसे पर चिंता जताते हुए कहा कि घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था की जा रही है.
हादसे में गंभीर रूप से घायलों को नागपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया है.
विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है.
सीजेपी ने कहा, स्कूलों के मुद्दे पर बीजेपी और विपक्षी सरकारों के रुख़ में स्पष्ट अंतर, इमरान क़ुरैशी, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, सीजेपी के सदस्यों ने कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा से मुलाक़ात की
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का कहना है कि देश में स्कूलों की स्थिति को लेकर उसके सुझावों पर बीजेपी शासित राज्यों और ग़ैर-बीजेपी दलों के शासन वाले राज्यों का रवैया स्पष्ट तौर पर अलग दिखता है.
बेंगलुरु शहर और उसके आसपास कुछ स्कूलों की अपनी पहली विज़िट पर सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "वहां (बीजेपी शासित राज्यों में) गुंडे भेजे जाते हैं, हमें पीटा जाता है, हिंसा फैलती है. लेकिन दूसरे राज्यों (जैसे पंजाब, झारखंड और कर्नाटक) में हमें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली."
रांका और सीजेपी की राष्ट्रीय सचिव आफ़रीन नवाज़ ने पिछले तीन दिनों में बेंगलुरु और उसके आसपास के स्कूलों का दौरा किया.
वहां सबसे प्रमुख समस्याओं में शिक्षकों की पूरी संख्या का मौजूद न होना (एसआईआर के कारण), गंदे शौचालय और ख़राब हालत में पड़ी इमारतें शामिल थीं.
रांका ने कहा, "कल हमने कर्नाटक के शिक्षा मंत्री (प्राथमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा) से मुलाक़ात की. सौरभ (दास) ने पंजाब के शिक्षा मंत्री से मुलाक़ात की, अंकित झारखंड में स्कूलों का दौरा कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "इसलिए, मुझे लगता है कि बीजेपी शासित राज्यों में किसी भी तरह का संवाद नहीं किया जा रहा है, किसी भी तरह की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश नहीं की जा रही है. पूरी ताक़त केवल गुंडागर्दी और हिंसा फैलाने में दिखाई जा रही है."
बेंगलुरु के स्कूलों में सीजेपी को क्या मिला
उन्होंने कहा, "वर्थुर के स्कूल में छत लगभग गिरने वाली थी. हाल ही में एक छोटा बच्चा बुरी तरह घायल होने से बाल-बाल बचा था. बच्चों को कक्षा से बाहर कर दिया गया है. अगले ही दिन मरम्मत का काम शुरू हो गया, जो मुझे लगता है कि एक सकारात्मक कदम है. हम सरकार से सिर्फ इतना कह रहे हैं कि कृपया हमारी ओर से कमियां बताए जाने का इंतजार न करें.”
रांका ने कहा, "कल कर्नाटक के प्राथमिक शिक्षा मंत्री ने हमें फ़ोन किया. उन्होंने हमारी प्रतिक्रिया सुनी और हमने बताया कि स्कूलों में शौचालयों की हालत बहुत खराब थी तो उन्होंने कहा कि शिक्षक एसआईआर ड्यूटी पर थे. उन्होंने हमारी बात ठीक से सुनी. इसलिए संवाद हुआ. जहां संवाद होगा, वहां सुधार होगा."
उन्होंने कर्नाटक के रवैये की तुलना राजस्थान, बंगाल में अपने और अपने सहयोगियों के अनुभव से की और कहा, "सभी ने देखा है कि उत्तर प्रदेश में अब्दुल के साथ क्या हुआ. हमारे लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जा रही है. इस तरह वे ख़ुद को ही धोखा दे रहे हैं."
उन्होंने कहा, "सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल हो, हम अपना काम जारी रखेंगे. हम सभी राज्यों के सभी स्कूलों का दौरा करेंगे और इसे देशव्यापी आंदोलन बनाएंगे."
पीएम मोदी ने ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम को किया संबोधित, की ये अपील
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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स को समर्थन देने की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम को संबोधित किया है. इस दौरान उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी साझेदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया.
पीएम मोदी ने कहा, "इस साल हम ब्रिक्स का 20वां साल मना रहे हैं. साल 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी तब इसमें चार देश थे. अब ब्रिक्स पार्टनर्स को मिलाकर यह 21 देशों का परिवार है. ब्रिक्स देश दुनिया की 50% आबादी, 40% जीडीपी, 25% से ज़्यादा व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं."
पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत के स्टार्टअप्स और यूपीआई का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत का रुख़ बेरियर्स को कम करना और कारोबार के लिए अवसर बढ़ाना है.
पीएम मोदी ने कहा, "ग्लोबल ट्रेड तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, सप्लाई रूट खुला हो और नाविक सुरक्षित हों. इसलिए भारत उनकी सुरक्षा का समर्थक है."
उन्होंने ब्रिक्स बिज़नेस काउंसिल से आग्रह किया कि ब्रिक्स देशों के बीच 10 शीर्ष बिजनेस बेरियर्स को हटाने की कोशिश करें और हर साल 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को दूसरे बाज़ारों में समर्थन देने की अपील की.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इन मुद्दों पर हुई बात
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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच दिल्ली में मुलाक़ात हुई है
प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस के बीच ख़ास रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की.
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "बिश्केक में हमारी मुलाक़ात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर खुशी हुई. आज की बैठक के दौरान हमने साल 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करने समेत व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर बात की."
उन्होंने लिखा, "इसमें बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग शामिल है. भारत की कोशिश ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दुनिया के कल्याण को आगे बढ़ाना है."
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच आपसी संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की."
उन्होंने लिखा है कि ये सारे क्षेत्र लंबे समय से चली आ रही भारत-रूस साझेदारी के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं.
रणधीर जायसवाल ने बताया, "दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में संघर्ष समेत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हित के मुद्दों पर भी विचार साझा किए."
"प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में सहायता के लिए तैयार है."
ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची ने अमेरिकी नेवी के एक अफ़सर की क्यों तारीफ़ की?
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इमेज कैप्शन, अब्बास अराग़ची ने कहा कि अमेरिकी जनता इसराइल के युद्धों का ख़र्च उठाने से बेहतर चीज़ों की हक़दार है (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी नेवी के एक्टिंग सेक्रेटरी के 'स्पष्ट बयान' की तारीफ़ की और कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने वास्तव में बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को नष्ट कर दिया.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, इससे पहले अख़बार ने हंग काओ के हवाले से कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय को 'नष्ट' कर दिया है.
अख़बार के लेख में कहा गया है कि अमेरिकी नौसेना बहरीन में स्थित अपने कमांड मुख्यालय के संबंध में क्या करना है, इसका 'मूल्यांकन' कर रही है.
काओ ने फिलाडेल्फिया में एक शिपयार्ड का दौरा करने के बाद अख़बार को यह बयान दिया.
अख़बार ने लिखा, "हालांकि सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त तस्वीरों में बहरीन के नौसैनिक अड्डे के हुए नुक़सान को दिखाया गया है, लेकिन काओ की टिप्पणियां इस ठिकाने पर लड़ाई के असर की सीधी और आधिकारिक स्वीकृति हैं."
कार्टून: वो कॉपी कर रहे हैं
इमेज कैप्शन, ट्रंप के चुनावी वादों पर आज का कार्टून
बाब अल-मंदेब पर 'हूती लड़ाकों का क़ब्ज़ा', बढ़ सकती है सऊदी अरब की मुश्किलें
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इमेज कैप्शन, यमन में कई जगहों से सरकारी सेना के पीछे हटने की ख़बरें आ रही हैं
बीबीसी फ़ारसी ने कई रिपोर्टों के हवाले से कहा है कि यमनी सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद, यमन के हूती हथियारबंद गुट ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित रणनीतिक द्वीप मयून पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
लाल सागर (रेड सी) के समुद्री जलमार्ग पर हूती लड़ाकों का क़ब्ज़ा सऊदी अरब के तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान लंबे समय तक होर्मुज़ स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद रहने के बाद, सऊदी अरब ने तेल निर्यात को लाल सागर तक पहुंचाने के लिए अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का रुख़ किया.
इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब अपनी खाड़ी से होने वाली कच्चे तेल की कुल निर्यात में से 70% तक तेल पाइपलाइन के ज़रिए लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह भेज रहा था.
इस पाइपलाइन के ज़रिए सऊदी अरब एशिया को तेल भेजने में सफल रहा है. इसके लिए तेल लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से होकर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के रास्ते जाता है.
अब हूती विद्रोहियों के उस द्वीप तक पहुंचने की ख़बरों के बाद, इसका असर सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ सकता है.
हूतियों का कहना है कि सऊदी अरब के जहाजों के अलावा वे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए कोई खतरा नहीं हैं.
इससे पहले रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने यमनी सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकारी सेनाएं मयून द्वीप से पीछे हट गई हैं.
मयून द्वीप, जिसे कई बार बाब अल-मंदेब द्वीप भी कहा जाता है, इस स्ट्रेट के मध्य में स्थित है. यह बाब अल-मंदेब दो जलमार्गों में बांटता है.
बीबीसी फ़ारसी ने बताया है कि कुछ घंटे पहले यह ख़बर आई थी कि यमन का तटीय शहर धुबाब भी हूती लड़ाकों के हाथ में आ गया है, जिससे सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर उनका लगभग पूरा नियंत्रण हो गया है.
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है. उसने पिछले सप्ताह सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी सेना के ख़िलाफ़ एक बड़ा हमला शुरू किया.
ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने यमन में रेड सी (लाल सागर) के मोखा पोर्ट पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
यह पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम है और इस पर सऊदी समर्थित सरकारी बलों का नियंत्रण था.
पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई मुलाक़ात, भेंट की यह किताब
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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से इतर द्विपक्षीय बैठक से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया.
पीएम मोदी ने इस मुलाक़ात में राष्ट्रपति पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध लेखक तिरुवल्लुवर की लिखी 'तिरुकुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया. तिरुकुरल तमिल भाषा का प्राचीन धर्म ग्रंथ है.
भारत में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हैं.
शुक्रवार शाम को पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच भी द्विपक्षीय बातचीत होनी है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान पहुंचे दिल्ली, शाम को होगी द्विपक्षीय बातचीत
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इमेज कैप्शन, पेज़ेश्कियान ने अपनी भारत यात्रा के पहले कहा 'ब्रिक्स में हमारा लक्ष्य अमेरिकी एकाधिकार से लड़ना है'
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं. भारत पहुंचने पर उनका स्वागत शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने किया.
पेज़ेश्कियान ने इस यात्रा की पूर्व संध्या पर तेहरान में कहा, "ब्रिक्स में हमारा लक्ष्य अमेरिकी एकाधिकार से लड़ना है."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पेज़ेश्कियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार शाम को द्विपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसका मक़सद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और आपसी संबंधों को मजबूत करना है.
पीटीआई के मुताबिक़ राष्ट्रपति के रूप में पेज़ेश्कियान की यह पहली भारत यात्रा है.
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक नाकेबंदी लागू की है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है.
नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले पेज़ेश्कियान ने ब्रिक्स के लिए अपनी आर्थिक मजबूती बढ़ाने पर ध्यान देने की ज़रूरत पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, "नया ब्रिक्स बैंक देशों को डॉलर पर निर्भरता से मुक्त करने और अमेरिकी दबदबे की कोशिश के ख़िलाफ़ खड़े होने के लिए बनाया गया था."
भारत में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम शामिल है.
बीजेपी के पूर्व सांसद परेश रावल ने क्याें कहा, 'गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है'
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह को दिल्ली की जगह गुजरात शिफ़्ट किए जाने पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं
राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह को गुजरात के केवड़िया में शिफ़्ट किए जाने पर फ़िल्म अभिनेता और बीजेपी के पूर्व सांसद परेश रावल ने प्रतिक्रिया दी है.
परेश रावल ने कहा, "गुजरात क्या बांग्लादेश में है या पाकिस्तान में? गुजरात हमारे देश का हिस्सा है, इसमें कौन सी बड़ी बात है. यह गुजरात में भी होना चाहिए."
परेश रावल ने कहा, "दिल्ली में 26 जनवरी की परेड होती है न. ये कार्यक्रम हर राज्य में होने चाहिए. इसमें कोई बुरी बात नहीं है. राजनीति का काम है सवाल उठाना. लेकिन मेरे हिसाब से इसमें कोई ग़लत बात नहीं है."
दरअसल नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरशन (एनएफ़डीसी) के मुताबिक़ 72वां राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित किया जाएगा.
इस मुद्दे पर राजनीति से लेकर फ़िल्म जगत के लोगों ने भी सवाल उठाए हैं.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने एक्स पर लिखा, "राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों के 72 साल के इतिहास में पहली बार समारोह को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से गुजरात के केवड़िया में स्थानांतरित किया जा रहा है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के महत्व को कम करने का लगातार प्रयास चल रहा है और अब दिल्ली के महत्व को भी धीरे-धीरे कम किया जा रहा है."
"शायद इस संभावना को भांपते हुए कि अंत में उनका प्रभाव केवल गुजरात तक सीमित रह सकता है, केंद्र में सत्ता में बैठे दोनों नेता वहां किसी तरह की भव्यता और महत्व स्थापित करने लगे हैं."
फ़िल्म निर्देशक राहुल ढोलकिया ने लिखा, "मुझे दिल्ली में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों के आयोजन को लेकर कोई ख़ास लगाव नहीं है, लेकिन मैं इनके आयोजन को गुजरात स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाता हूं. गुजरात ही क्यों?"
"आप किसी दूसरे शहर या राज्य में पुरस्कार देने की परंपरा को क्यों तोड़ रहे हैं, तो फिर यह सम्मान ऐसे राज्य को क्यों नहीं दिया जाता, जिसने सिनेमा में योगदान दिया है? जैसे महाराष्ट्र, केरल या तमिलनाडु. यहां तक कि हैदराबाद जैसे किसी शहर को भी यह सम्मान दिया जा सकता है."
यमन पर यूएन सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक: पाकिस्तान ने सऊदी अरब को लेकर ये कहा
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हूती विद्रोहियों के हमले के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब का समर्थन किया है.
पाकिस्तान ने यमन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति समर्थन जताया.
पाकिस्तान ने कहा कि वह सऊदी नेतृत्व, सरकार और भाईचारे वाले लोगों के साथ पूरी तरह से एकजुटता से खड़ा है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक़,''सऊदी अरब को अपने क्षेत्र की रक्षा करने,अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा करने और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा करने के लिए सभी जरूरी उपाय करने का वैध अधिकार है.''
सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक यमन की ताजा स्थिति और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के संदर्भ में बुलाई गई थी, जहां पाकिस्तान ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा के अधिकार के संबंध में अपनी स्थिति को दोहराया.
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ब्रिक्स सम्मेलन से पहले पीएम मोदी करेंगे पुतिन और पेज़ेश्कियान से बातचीत
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इमेज कैप्शन, अगस्त 2026 में किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ की बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाक़ात (फ़ाइल फ़ोटो)
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सदस्य देशों वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे.
ब्रिक्स सम्मेलन 12 सितंबर से शुरू हो रहा है. लेकिन इससे पहले 11 सितंबर को उनकी पुतिन से मुलाक़ात होगी.
हालांकि मंत्रालय ने ये नहीं बताया है कि इस बैठक में दोनों के बीच किन एजेंडों पर बातचीत होगी.
पुतिन के अलावा पीएम मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से भी बातचीत करेंगे. उनकी ये मुलाक़ात शाम साढ़े छह बजे होगी.
ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है.
मायावती का सपा-कांग्रेस पर तंज़, कहा- नीला रंग अपनाने से जातिवादी सोच नहीं बदलेगी
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इमेज कैप्शन, बीएसपी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा है (फ़ाइल फ़ोटो)
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तंज़ करते हुए कहा है कि नीला रंग अपनाने से विपक्षी दलों की जातिवादी सोच नहीं बदलेगी.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा किसमाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोग नीला रंग अपनाना चाहते हैं. वो अपने गमछे और स्टेज का रंग नीला करना चाहते हैं. लेकिन सिर्फ़ ऐसा करने से गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े और दूसरे उपेक्षित वर्ग के लोगों के प्रति उनकी जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता नहीं बदल सकती.
मायावती ने लिखा कि समाजवादी और कांग्रेस के लोग सामंती और पूंजीवादी मानसिकता के हैं. ये लोग दिल से आंबेडकरवादी नहीं हैं.
उन्होंने लिखा, वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं.अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं. ख़ासकर सपा के पीडीए के मामले में सोच हमेशा दोग़ली और बेईमान रही है.''
मायावती ने ये टिप्पणी समाजवादी पार्टी के उस कदम के बाद की है, जिसके तहत उसने अपने छात्र संगठन समाजवादी छात्र सभा के लिए एक नया ड्रेस कोड तय किया है, जिसमें नीला रंग प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाएगा.
नीले रंग का ख़ास राजनीतिक महत्व है. यह लंबे समय से दलित राजनीति और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ा रहा है.
अमेरिका ला सकता है एच-1बी कर्मचारियों की 'मुश्किलें बढ़ाने' वाला एक और क़ानून
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ट्रंप प्रशासन ने कुछ आप्रवासियों के लिए नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रुककर नई नौकरी या नए स्पॉन्सर की तलाश करने के लिए मिलने वाली 60 दिन की छूट खत्म करने का प्रस्ताव रखा है.
इनमें एच-1बी वीज़ा पर काम करने वाले कुशल कर्मचारी भी शामिल हैं. गुरुवार को ऑनलाइन जारी एक सरकारी नोटिस में यह जानकारी दी गई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमेरिकी होम लैंड सिक्योरिटी की ओर से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित प्रस्तावित नियम के तहत एच-1बी और कुछ अन्य अस्थायी वर्क वीज़ा धारकों को नौकरी खत्म होते ही अमेरिका छोड़ना होगा.
इससे उन बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों को झटका लग सकता है, जो बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर हैं.
जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लीगल इमिग्रेशन को सीमित करने की यह ताज़ा कोशिश है.
उनके प्रशासन ने कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए वीज़ा फीस बढ़ाने के कदम भी उठाए हैं.
इसके अलावा, एक नए ट्रेनिंग प्रोग्राम को लागू करने के दौरान दुनिया भर में अमेरिकी मिशनों में इमिग्रेंट वीज़ा अपॉइंटमेंट पर अस्थायी रोक भी लगाई गई है.
होमलैंड सिक्योरिटी ने अपने प्रस्ताव में कहा कि इस बदलाव से प्रभावित कंपनियों के कामकाज पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन इन नौकरियों में अमेरिकी कर्मचारियों को रखा जा सकता है.
ट्रंप ने कहा- ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध पर कोई अफ़सोस नहीं
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान युद्ध शुरू करने का कोई अफ़सोस नहीं है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर युद्ध के असर के बावजूद उन्हें ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने का कोई पछतावा नहीं है.
'फॉक्स न्यूज़' की होस्ट लॉरा इंग्राहम के साथ इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनावों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए उन्हें ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध पर अफ़सोस है, तो ट्रंप ने कहा, "मैं 'पछतावा' शब्द में विश्वास नहीं करता. आप हमेशा खुद से थोड़ा सवाल कर सकते हैं."
गुरुवार को प्रसारित कार्यक्रम "द इंग्राहम एंगल" में ट्रंप ने कहा, "अगर मुझे दोबारा ऐसा करना पड़े, तो मैं ठीक वही करता, जो मैंने किया."
ट्रंप ने उन दावों को भी खारिज किया कि उनके कुछ समर्थक युद्ध से नाराज़ और हतोत्साहित हैं.