पश्चिम बंगाल से लोगों के 'पुश-इन' पर बांग्लादेश में उठते सवाल, क्या भारत से रिश्तों पर पड़ेगा असर

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- Author, रकीब हसनत
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला
- प्रकाशित
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आते ही बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाक़ों में कथित बांग्लादेशी घुसपैठिये बताए जाने वालों को वापस भेजे जाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में न आने वाले 4,800 कथित घुसपैठियों को पहले ही बांग्लादेश भेज दिया गया है.
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि इसके अतिरिक्त 836 लोगों को होल्डिंग सेंटरों में रखा गया है और इन्हें पश्चिम बंगाल सरकार सीमा पार 'पुशबैक' करेगी.
बीबीसी की बांग्ला सेवा के मुताबिक़ बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने रविवार की रात को बांग्लादेश के कुरीग्राम ज़िले में रामौरी से बॉर्डर के ज़रिये 'धकेले गए' लोगों को वापस भेज दिया है.
बीबीसी की बांग्ला सेवा के मुताबिक़ कई दिनों की नाकाम कोशिशों के बाद भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) ने भारतीय सीमा के अंदर ठाकुरगांव और पांचागढ़ में जमा लोगों को बांग्लादेश सीमा के पार भेज दिया.
दोनों ओर से इस तरह के दावों के बाद बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) और भारत की बीएसएफ़ के महानिदेशकों के बीच नई दिल्ली में बैठक हुई है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सीमा मुद्दों को लेकर बीजीबी और बीएसएफ़ डीजी के बीच में बैठक चल रही है.
साथ ही उन्होंने कहा कि "कोई भी विदेशी नागरिक जो भारत में अवैध रूप से रह रहा है तो उन पर भारतीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी. नो मेन्स लैंड में कुछ लोगों के होने की जो बात कही जा रही है, तो दोनों पक्षों के बीच में बातचीत चल रही है तो शायद इस पर भी बात हो."
लेकिन सवाल यह उठता है कि बांग्लादेश इस साल फ़रवरी के चुनावों के बाद नई सरकार के सत्ता में आने के बाद जब भारत से संबंध सुधारने में दिलचस्पी दिखा रहा है तो पश्चिम बंगाल से लगी सीमा पर अचानक लोगों को जबरन बांग्लादेश भेजे जाने (पुश-इन) की घटनाएं क्यों बढ़ गई हैं.
रिश्तों की राह में रोड़े की आशंका

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बांग्लादेश में पूर्व राजनयिकों और विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश और भारत तीस्ता नदी के जल बंटवारे और गंगा जल संधि समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की तैयारी कर रहे हैं.
उनका मानना है कि इन बातचीत से पहले दबाव बनाने के मक़सद से 'पुश-इन' की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
सोमवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश राज्य मंत्री शमा उबैद ने कहा कि 'पुश-इन' की घटनाओं को रोकने के लिए बांग्लादेश सरकार की ओर से भारत को 12 से 13 पत्र भेजे जा चुके हैं.
दो देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश पर 'पुश-इन' के इन मामलों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "अगर भारत सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से लेगी तो दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाना अधिक आसान होगा."
इससे पहले, बीजीबी की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज़ में कहा गया, "इंटरेशनल बॉर्डर मैनेजमेंट के सिद्धांतों, प्रचलित क़ानूनों और द्विपक्षीय समझौतों के उलट होने वाले किसी भी 'पुश-इन' कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा.''
अगस्त 204 में शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में बनी अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश-भारत संबंधों में साफ़तौर पर तनाव दिखा था.
दोनों देशों में वीज़ा प्रक्रियाओं के सीमित होने के साथ-साथ कुछ नेताओं के बयानों और जवाबी प्रतिक्रियाओं से आपसी तनाव बढ़ गया था.
यहां तक कि दोनों देशों के उच्चायोगों के बाहर हुए प्रदर्शनों के बाद एक-दूसरे के उच्चायुक्तों को तलब किए जाने की घटनाएं भी हुईं.
हालांकि, इस साल फ़रवरी में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने और सामान्य बनाने की दिशा में दिलचस्पी दिखानी शुरू की.

पिछले तीन महीनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की यात्राएं, प्रधानमंत्रियों के बीच टेलीफ़ोन पर बातचीत और दूसरी कूटनीतिक पहल भी देखने को मिलीं.
लेकिन इसी बीच, पिछले महीने की शुरुआत से सीमा पर बीएसएफ़ की ओर से 'पुश-इन' की इन कोशिशों ने एक नई बहस छेड़ दी है.
बीजीबी (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) ने गुरुवार की सुबह जारी एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि पिछले 24 घंटों में कम से कम दस जगहों पर ऐसी कोशिशों को नाकाम कर दिया गया.
बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के मुताबिक़, ''ये घटनाएं विशेष रूप से झेनाइदाह के जादवपुर सीमा क्षेत्र, महेशपुर सीमा, जेसोर के गोगा और रुद्रपुर, जॉयपुरहाट के काया और बसुदेव सीमा क्षेत्रों, चपाईनवाबगंज सीमा, ठाकुरगांव सीमा, नेत्रकोना सीमा, पंचगढ़ सीमा तथा सिलहट के उत्तमछड़ा बॉर्डर एरिया में हुईं.''
बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने बीजीबी को सीमा पर कड़ा रुख़ बनाए रखने का निर्देश दिया है.
विश्लेषकों का मानना है कि एक साथ इतने अधिक बॉर्डर प्वाइंट से लोगों को बांग्लादेश में 'धकेलने' की कोशिशों के पीछे अलग-अलग संदेश या मक़सद हो सकते हैं.
ख़ासकर ऐसे समय में जब दोनों देश गंगा जल बंटवारा समझौते सहित कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता की तैयारी कर रहे हैं और दोनों सरकारें संबंधों को सामान्य बनाने की इच्छा जता रही हैं.
क्या भारत बांग्लादेश पर दबाव बना रहा है?

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कुछ लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार सत्ता में आई है इसलिए ऐसा हो रहा है.
वहीं कई लोगों का यह भी मानना है कि जिस तरह केंद्र सरकार ने बांग्लादेश के साथ मिलकर काम करने में रुचि दिखाई है, उसे देखते हुए बीएसएफ़ का इस्तेमाल कर लोगों को पश्चिम बंगाल सीमा के रास्ते बांग्लादेश में धकेलना सामान्य बात नहीं लगती.
हाल ही में बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि अगर कोई बांग्लादेशी भारत में अवैध रूप से रह रहा है, तो भारत सरकार को उसके संबंध में सबूतों सहित सूची उपलब्ध करानी चाहिए.
इस बीच राजनीतिक हलकों में इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि क्या सरकार एक के बाद एक हो रहे इन 'पुश-इन' प्रयासों के ख़िलाफ़ कड़ा विरोध दर्ज कराएगी.
कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश की ओर से भारत सरकार को पत्र भेजने के अलावा राजनीतिक और राजनयिक माध्यमों से भी बातचीत जारी है.
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि 'पुश-इन' की इन कोशिशों को बांग्लादेश पर दबाव बनाने के मक़सद से किया जा रहा है.
पूर्व राजदूत मुंशी फै़ज़ अहमद का कहना है, "मुझे लगता है कि किसी दूसरी वजह से बांग्लादेश पर किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि ये घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब दोनों सरकारें आपसी संबंधों को बेहतर बनाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं. ''
उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "तीस्ता, गंगा जल बंटवारा और दोनों देशों के संबंध. सब कुछ इस समय एक अहम मोड़ पर है. अब हमें हर मुद्दे पर बातचीत करनी है. ऐसी स्थिति में ये घटनाएं एक संदेश भी हो सकती हैं. मेरा मानना है कि राष्ट्रीय हित में संबंधों को सामान्य बनाने के लिए पहल की जानी चाहिए."
ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रोफे़सर डॉ. लैलुफ़र यासमीन का भी कहना है कि 'पुश-इन' की ये घटनाएं कुछ हद तक आश्चर्यजनक हैं, क्योंकि इस समय दोनों सरकारें द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की बात कर रही हैं.
उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "पश्चिम बंगाल में नई सरकार सत्ता में आई है. ये भी देखना होगा कि क्या भारत की केंद्र सरकार राज्य सरकार का इस्तेमाल करके बांग्लादेश पर दबाव तो नहीं बना रही है. 'पुश-इन' की घटनाओं में अचानक आई बढ़ोतरी के बावजूद इसकी असली वजहों को समझने में कुछ समय लग सकता है. संभव है कि बाद में यह साफ़ हो कि बांग्लादेश को दबाव में रखने के लिए यह एक रणनीति का हिस्सा था."
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर की आशंका

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दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने के प्रयासों पर 'पुश-इन' की घटनाओं के संभावित असर के बारे में पूछने पर विदेश राज्य मंत्री शमा उबैद ने कहा, "हर घटना अलग होती है. लेकिन अगर सीमा पर ऐसी घटनाएं होती हैं और भारत सरकार इन्हें गंभीरता से लेती है, तो हमारे लिए संबंधों को आगे बढ़ाना अधिक आसान होगा."
उन्होंने कहा कि हाल ही में चेन्नई से 34 लोगों को वापस बांग्लादेश लाया गया है.
विदेश राज्य मंत्री ने कहा, "अगर बांग्लादेश में कोई भारतीय नागरिक अवैध रूप से रह रहा है या भारत में कोई बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा है, तो उन्हें वापस भेजने और अपने नागरिकों को लौटाने के लिए एक स्थापित व्यवस्था (मेकैनिज्म) मौजूद है."
उबैद ने कहा, "भारत को उसी मौजूदा व्यवस्था और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत हमारे साथ काम करना होगा और बातचीत करनी होगी. बांग्लादेश भी यही करेगा."
उन्होंने कहा, "हम सभी कूटनीतिक मानदंडों का पालन कर रहे हैं. जब भी हमें 'पुश-इन' की कोई घटना दिखाई देती है, हम भारत को पत्र लिखते हैं. मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और उचित कूटनीतिक माध्यमों से इसका समाधान करेगी."
उन्होंने कहा, ''अगर ये काम 'पुश इन' के ज़रिये किया जाएगा, तो यह अच्छा नहीं होगा. अगर भारत और बांग्लादेश आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं तो दोनों देशों को मौजूदा प्रक्रियाओं और स्थापित व्यवस्थाओं का ही पालन करना चाहिए."
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